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संगीत का महात्‍म्‍य:एक चिंतन

ccastयाज्ञवल्‍क्‍य स्‍मृति में लिखा है:-

” वीणा वादन तत्‍वज्ञ: श्रुति जाति विशारद: ।

तालज्ञश्‍चाप्रयासेन मोक्ष मार्गम् च गच्‍छति।।”

अर्थात् जो वीणा वादन के तत्‍व को जान लेता है और जो श्रुति जाति तथा ताल में विशारद हो चुका है वह बिना प्रयास के ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्‍त करता है।

उपरोक्‍त कथन भले ही आज से हज़ारों वर्ष पहले लिखा गया हो पर आज भी इस बात को अनुभव करने वाले इस कथन की सत्‍यता पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाना कदापि पसंद नहीं करते हैं। Continue reading