अर्थ

vvtumस्‍वरों का संसार तो इस धरती पर वायु और अग्नि के साथ ही प्रगट हो गया था। पर उसकी सत्‍ता का ज्ञान प्राप्‍त करने में युगों का समय लगा। इसका आभास ही हृदय में एक अनूठी अनुभूति प्रदान कर देता है कि धरती की आत्‍मा को जागृत करने वाली इस अमूल्‍य धरोहर को ईश्‍वर ने कितना सुन्‍दर और मधुर बनाया है। स्‍वरों के प्रतिष्ठित होने की गाथा तो बहुत लम्‍बी है पर सप्‍तक के सात स्‍वरों को प्रगट करने में जिन प्रमुख चार स्‍वरों का हस्‍तक्षेप है  उनके अवतरण की कथा भी कम रोचक नहीं। इनके बिना तो सम्‍पूर्ण सप्‍तक का निर्माण संभव नहीं।

ये चार स्‍वर हैं — षड्ज, गांधार, मध्‍यम और पंचम। षडज स्‍वर से पंचम, मध्‍यम और गांधार के बीच का अन्‍तराल स्‍वाभाविक और प्राकृतिक है यह सत्‍य सर्वविदित है। षडज स्‍वर, अन्‍य स्‍वरों को उपजाने का कारक है अस्‍तु यह स्‍वर स्‍वत: सिद्ध है। किन्‍तु पंचम स्‍वर की उत्पत्ति, षडज से संवाद के आधार पर ही होती है। ठीक उसी प्रकार मध्‍यम स्‍वर तथा गांधार स्‍वर भी षडज के गर्भ से प्रस्‍फुटित होते हैं। जिस प्रकार षडज से पंचम के संवाद या अन्‍तराल को षडज-पंचम भाव तथा षडज से मध्‍यम के संवाद अथवा अन्‍तराल को षडज-मध्‍यम भाव कहते हैं उसी तरह षडज – गांधार का संवाद ‘षडजांतर’ भाव के नाम से प्रतिष्ठित हुआ है। यह ‘षडजांतर’ वास्‍तव में षडज और अंतर गांधार(आधुनिक शुद्धगांधार) के बीच का अन्‍तराल है जो स्‍वयंभू अर्थात् स्‍वत: अवतरित होने वाला है। व्यावहारिक रूप से इसके दर्शन इस प्रकार संभव हैं। तानपुरे के स्‍वर पूरी तरह से सुर में मिला लिये जायें और उसे लगातार बजाते जायें तो एक अन्‍य स्‍वर अपने आप सुनाई पड़ेगा जो कि अन्‍तर गांधार स्‍वर ही है।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि जिस प्रकार षडज के बजने से गांधार स्‍वर जो उसी के अन्‍दर प्रतिष्ठित है सुनने वाले को अलग ही से सुनाई पड़ जाता है ठीक वैसे ही मेरे मन के विचार प्रगट होकर सुविज्ञ जनों तक पहुँचे। जिस प्रकार षडज के अन्‍दर बसे गांधार के दर्शन ज्ञानी कर लेते हैं वैसे ही मेरे आत्‍मघटक से निकले विचारों  का सेवन जिज्ञासु करेंगे ऐसी मुझे आशा है। यही है मेरा ‘षडजांतर’

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One response to “अर्थ

  1. Dr. Santosh Pathak

    This is very unique work on music. this is the right time to do some thing in music .
    I thing it is very use full all music lovers, students, teacher and all.
    Thank you for the good work .

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